सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Psoriasis


सोरायसिस एक पुरानी त्वचा की बीमारी है जिसमें त्वचा पर लाल, खुजलीदार, परतदार चकत्ते बनते हैं, इसे हिंदी में “सोरायसिस (छाल रोग)” कहा जाता है।यह संक्रामक नहीं है, यानी छूने या साथ रहने से किसी दूसरे को नहीं फैलता।सोरायसिस क्या हैसोरायसिस एक ऑटोइम्यून (प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी) बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली त्वचा की कोशिकाओं को जरूरत से ज्यादा तेजी से बनने के लिए उत्तेजित कर देती है। इसकी वजह से त्वचा पर मोटे, लाल, सूखे और सफेद/चाँदी जैसे पपड़ीदार धब्बे या प्लाक बन जाते हैं, जो अक्सर कोहनी, घुटने, सिर और पीठ पर दिखते हैं।मुख्य लक्षण त्वचा पर लाल या लाल-भूरे रंग के चकत्ते जिन पर सफेद या चांदी जैसी परत जम जाती है।खुजली, जलन या चुभन की शिकायत, कई बार त्वचा सूखी और फटी हुई भी हो सकती है, जिससे हल्का खून या दर्द हो सकता है। सिर पर डैंड्रफ जैसा मोटा सफेद पपड़ीदार स्कैल्प, नाखूनों में मोटापन, रंग बदलना या गड्ढे बनना भी दिख सकता है।

कारण और जोखिम कारक 

सोरायसिस का मुख्य कारण प्रतिरक्षा तंत्र की गड़बड़ी और आनुवंशिक (परिवार में चलने वाला) प्रवृत्ति मानी जाती है। कुछ कारक जैसे तनाव, त्वचा पर चोट, कुछ दवाइयाँ, संक्रमण (विशेषकर गले का स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण), धूम्रपान और शराब का सेवन इसके भड़कने या बढ़ने में भूमिका निभा सकते हैं कारण और जोखिम कारक सोरायसिस का मुख्य कारण प्रतिरक्षा तंत्र की गड़बड़ी और आनुवंशिक (परिवार में चलने वाला) प्रवृत्ति मानी जाती है। कुछ कारक जैसे तनाव, त्वचा पर चोट, कुछ दवाइयाँ, संक्रमण (विशेषकर गले का स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण), धूम्रपान और शराब का सेवन इसके भड़कने या बढ़ने में भूमिका निभा सकते हैं। होम्योपैथिक दृष्टिकोणहोम्योपैथिक प्रबंधन में विस्तृत केस-टेकिंग के बाद constitutional और acute दोनों तरह के औषधि चयन पर ज़ोर दिया जाता है, ताकि प्रतिरक्षा असंतुलन, मानसिक तनाव, खाने-पीने की आदतें और पारिवारिक प्रवृत्ति जैसे कारकों को संबोधित किया जा सके।कई केस सीरीज़ में PASI और DLQI जैसे स्केल्स पर स्कोर में उल्लेखनीय कमी, दीर्घकालिक remission और जीवन-गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है, जो नियमित और दीर्घकालिक फॉलो‑अप के साथ मिले हैं।

⚠️ महत्वपूर्ण सूचना

यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्य से दी गई है। औषधि का चयन रोगी की समग्र लक्षण-चित्र (Totality of Symptoms) के आधार पर योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए।

प्रायः उपयोग की जाने वाली दवाएँ - Calcarea carbonica, Sulphur, Lycopodium, Natrum muriaticum, Arsenicum album, Graphites, Mercurius solubilis, Petroleum, Pulsatilla, Sepia, Nux vomica

Designed by Dr Imran